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शुक्रवार सितम्बर 03

कतील शिफाई [जीवन परिचय) - अभिषेक सागर

abhishek sagarउर्दू के सुप्रसिद्ध शायर औरंगज़ेब खान उर्फ क़तील शिफ़ाई का जन्म 24 दिसम्बर 1919 को पाकिस्तान के हज़ारा तहसील के हरीपुर में हुआ था। उर्दू गज़ल की दुनिया में अपना नाम उन्होंने अपने उस्ताद हकीम मोहम्मद ‘सिफिया’ के नाम पर शिफ़ाई रख लिया और क़तील उनका तखल्लुस बन गया किसका मतलब ‘वो जिसका कत्ल हो चुका’ है। इस तरह क़तील शिफ़ाई का जन्म हुआ।

प्रकृति का स्वर्ग: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह 4[आलेख] - कृष्ण कुमार यादव

साहित्य शिल्पी

लघु अंडमान- पोर्टब्लेयर से 120 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित लघु अंडमान द्वीप में मूलत: निकोबारी, ओंगी और पूर्वी पाकिस्तान से लाकर बसाये गए लोग हैं। यहाँ पर चमकीले रेतीले तट, क्रीक से गुजरती हुई बोटिंग के अलावा झरनों व हाथी की सवारी का भी आनंद उठाया जा सकता है। यहाँ के बटलर बे तट, नेता जी नगर तट व हरमिंदर बे तट प्रसिद्ध हैं तो हट बे से क्रमश: 6.5 व 20 किलोमीटर दूर स्थित व्हाइट सर्फ व व्हिस्पर वेव झरनों का लुत्फ उठाने से कोई नहीं चूकता है।

पृथ्वीराज रासो [हिन्दी साहित्य का इतिहास 9] - अजय यादव

Ajay Yadav

पृथ्वीराज रासो संपूर्ण रासो साहित्य का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है। कई विद्वान इसे हिन्दी का पहला महाकाव्य और इसके रचयिता चंदबरदाई को पहला महाकवि भी मानते हैं। इसके विपरीत कई अन्य विद्वान इसे पूर्णतया जाली ग्रंथ भी कहते हैं।

इसके रचनाकार चंद के बारे में प्रसिद्ध है कि उनका और पृथ्वीराज चौहान का जन्म भी एक ही दिन हुआ था और मृत्यु भी। वे पृथ्वीराज के अनन्य मित्र, सामन्त और राजकवि सभी कुछ थे।

शिवरीनारायण में रथयात्रा [आलेख] - प्रो. अश्विनी केशरवानी

Kesarvani

महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के त्रिधारा संगम के तट पर स्थित प्राचीन, प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण और ''छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी'' के नाम से विख्यात् शिवरीनारायण बिलासपुर से 64 कि. मी., राजधानी रायपुर से बलौदाबाजार से होकर 120 कि. मी., जांजगीर जिला मुख्यालय से 60 कि. मी., कोरबा जिला मुख्यालय से 110 कि. मी. और रायगढ़ जिला मुख्यालय से सारंगढ़ होकर 110 कि. मी. की दूरी पर अवस्थित है। अप्रतिम सौंदर्य और चतुर्भुजी विष्णु की मूर्तियों की अधिकता के कारण स्कंद पुराण में इसे श्री पुरूषोत्तम और श्री नारायण क्षेत्र कहा गया है।

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डॉ. सुधा ओम ढींगरा के काव्य संग्रह '' धूप से रूठी चांदनी '' का विमोचन समारोह अमेरिका और भारत में एक साथ [साहित्य समाचार]

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रचनाकार:कुबेरनी हनुमंथप्पा बुधवार, मई 12 2010 06:00

Kaifi

प्रतिष्ठित पत्रकार, कवयित्री, कहानीकार, उपन्यासकार डॉ. सुधा ओम ढींगरा का काव्य संग्रह '' धूप से रूठी चांदनी '' ( शिवना प्रकाशन ) का विमोचन समारोह अमेरिका और भारत में एक साथ हुआ. अमेरिका में हिन्दू भवन (मौरिसविल, नॉर्थ कैरोलाईना) के सांस्कृतिक भवन के भव्य प्रांगण में हिंदी विकास मंडल और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की नॉर्थ कैरोलाईना शाखा के तत्वावधान में बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ. हिंदी विकास मंडल के संरक्षक श्री गंगाधर शर्मा जी ने ज्योति प्रज्जवलित कर कार्यक्रम को आरंभ किया.

Sudha Dhingra's Book

६०० से अधिक श्रोतागणों के सम्मुख स्थानीय कवयित्री बिंदु सिंह ने डॉ. सुधा ओम ढींगरा के रचना संसार की झलक लोगों को दी और हिंदी के प्रति उनकी निष्ठां और कार्यों का चित्रात्मक वर्णन किया. उनके काव्य संग्रह '' धूप से रूठी चांदनी '' की कविताओं से श्रोताओं का परिचय करवाया और स्टेज पर श्रीमती सरोज शर्मा (अध्यक्ष हिंदी विकास मंडल ), अफ़रोज़ ताज(प्रोफेसर यू.एन.सी चैपल हिल ), कवि आश कर्ण अटल, कवि महेन्द्र अजनबी और कवि अरुण जैमिनी जी को पुस्तक के विमोचन के लिया बुलाया और आप सब ने ''धूप से रूठी चांदनी'' का विधिवत विमोचन किया. नई नवेली दुल्हन का घूँघट हटाया गया. तीनों कवियों को समृति चिन्ह प्रदान किया गया और उसके बाद फिर शुरू हुआ कवि सम्मलेन. आश कर्ण अटल, महेन्द्र अजनबी और अरुण जैमिनी जी ने हास्य और व्यंग्य के तीरों से श्रोताओं का तीन घंटे खूब मंनोरंजन किया.श्रोतागण उठने को तैयार नहीं थे, पर धन्यवाद और बधाइयों के साथ समरोह का समापन हुआ.

भारत में डॉ. सुधा ओम ढींगरा की पुस्तक '' धूप से रूठी चाँदनी ''(शिवना प्रकाशन) का विमोचन सीहोर की अग्रणी साहित्य प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन तथा मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. सुकवि मोहन राय की स्मृति में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन भी किया गया. सीहोर के कुइया गार्डन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक श्री रमेश सक्सेना, सुकवि स्व. मोहन राय की धर्मपत्नी श्रीमती शशिकला राय सहित पद्मश्री बशीर बद्र, पद्मश्री बेकल उत्साही, डॉ. राहत इन्दौरी तथा मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की सचिव नुसरत मेहदी सहित सभी शायरों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा सुकवि स्व. मोहन राय के चित्र पर पुष्पाँजलि तथा दीप प्रावलित करके किया.

Sudha Dhingra's Book

सभी अतिथियों का स्वागत संयोजक श्री राजकुमार गुप्ता द्वारा तथा आयोजन प्रमुख श्री पुरुषोत्तम कुइया ने किया. शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकों का विमोचन सभी अतिथियों द्वारा किया गया. कार्यक्रम में शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकों मोनिका हठीला की ''एक खुशबू टहलती रही '', सीमा गुप्ता की ''विरह के रंग'', मेजर संजय चतुर्वेदी की ''चाँद पर चाँदनी नहीं होती'' का भी विमोचन किया गया, साथ ही डॉ. आजम को सुकवि मोहन राय स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया. विमोचन के पश्चात तीनों उपस्थित लेखकों मोनिका हठीला, सीमा गुप्ता तथा संजय चतुर्वेदी का शिवना प्रकाशन तथा भोजक परिवार भुज द्वारा शाल, श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया. सुधा ओम ढींगरा की अनुपस्थिति में उनका शाल, श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह उर्दू अकादमी की महा सचिव नुसरत मेहदी जी ने स्वीकार किया. सुकवि स्व. मोहन राय स्मृति पुरस्कार की घोषणा तथा पुरस्कृत होने वाले कवि डॉ. आजम का संक्षिप्त परिचय चयन समिति की अध्यक्ष तथा स्थानीय महाविद्यालय में हिंदी की प्रोफेसर डॉ. श्रीमती पुष्पा दुबे द्वारा दिया गया.

पंडित शैलेष तिवारी के स्वस्ति वाचन के बीच अतिथियों द्वारा डॉ. आजम को मंगल तिलक कर, शाल श्रीफल, सम्मान पत्र तथा स्मृति चिन्ह भेंटकर सुकवि स्व. मोहन राय स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया. मुख्य अतिथि विधायक श्री रमेश सक्सेना जी ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि धन्य हैं शिवना के साथी गण जो कि अपने साथी की स्मृति में इतना भव्य आयोजन कर रहे हैं. श्री सक्सेना ने शिवना प्रकाशन के आयोजन की भूरि भूरि प्रशंसा की. पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र ने कहा कि सीहोर आना हमेशा से ही मेरे लिये आकर्षण का विषय रहता है क्योंकि यहां पर मुझे बहुत प्यार मिलता है. नुसरत मेहदी ने अपने संबोधन में कहा कि शिवना प्रकाशन के साथियों ने सीहोर में जो भव्य आयोजन रचा है वैसा कम ही देखने को मिलता है. शिवना प्रकाशन ने सीहोर में आज इतिहास रच दिया है. कार्यक्र्रम के सूत्रधार द्वय रमेश हठीला तथा पंकज सुबीर ने सभी अतिथियों को शिवना प्रकाशन की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान किये, साथ ही कार्यक्रम संचालक श्री प्रदीप एस चौहान को सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया.

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया. शायरों का स्वागत बैज, पुष्पमाला तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर श्री सोनू ठाकुर, विक्की कौशल, सनी गौस्वामी, सुधीर मालवीय, नवेद खान, प्रवीण विश्वकर्मा, प्रकाश अर्श, वीनस केसरी, अंकित सफर, रविकांत पांडे आदि ने किया. पद्मश्री बेकल उत्साही, डॉ. राहत इन्दौरी, नुसरत मेहदी, शकील जमाली, खुरशीद हैदर, अख्तर ग्वालियरी, शाकिर रजा, सिकन्दर हयात गड़बड़, अतहर सिरोंजी, सुलेमान मज़ाज , जिया राना, सुश्री राना जेबा, फारुक अंजुम, काजी मलिक नवेद, ताजुद्दीन ताज, मोनिका हठीला, मेजर संजय चतुर्वेदी, सीमा गुप्ता, डॉ. आाम जैसे शायरों की रचनाओं का कुइया गार्डन में उपस्थित श्रोता रात तीन बजे तक आनंद लेते रहे. डॉ. राहत इन्दौरी, बेकल उत्साही, खुर्शीद हैदर जैसे शायरों की गज़लों का श्रोताओं ने खूब आनंद लिया. श्रोताओं से खचाखच भरे मैदान पर देर रात तक काव्य रस की वर्षा होती रही. श्रोताओं ने अपने मनपसंद शायरों से खूब फरमाइश कर करके ग़ज़लें सुनीं. कार्यक्रम संचालन प्रदीप एस चौहान ने किया. अंत में आभार शिवना प्रकाशन के पंकज सुबीर ने किया.

 

Comments  

 
0 # निधि अग्रवाल 2010-05-12 08:10
सुधा जी को हार्दिक बधाई। साहित्य शिल्पी पर अगर इस संग्रह की प्रमुख कवितायें पढने को मिलें तो सोने पर सुहागा हो जायेगा
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0 # नितेश नंदा 2010-05-12 08:15
निधि जी से सहमत होते हुए मैं कहना चाहता हूँ कि इस प्रकार की पुस्तकों की समीक्षा भी साहित्य शिपी पर प्रस्तुत होनी चाहिये।
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0 # Alok Kataria 2010-05-12 08:21
Nice
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0 # दीपक शर्मा 2010-05-12 08:27
बधाई सुधा जी
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0 # अनिल कुमार 2010-05-12 13:21
हार्दिक बधाई
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0 # अभिषेक सागर 2010-05-12 13:52
समाचार के लिए धन्यवाद
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0 # राजीव रंजन प्रसाद 2010-05-12 14:07
आदरणीया सुधा जी को साहित्य शिल्पी परिवार की ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनायें।
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0 # PRAN SHARMA 2010-05-12 14:42
SUDHA DHINGRA JEE KO NAANAA BADHAAEEYAN
AUR SHUBH KAMNAAYEN.
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0 # Shashi Padha 2010-05-12 18:45
सुधा जी को इस नये काव्य संग्रह के विमोचन के अवसर पर हार्दिक बधाई । आशा है शीघ्र ही इस संग्रह की रचनाएँ पढ़ने का अवसर मिलेगा ।
स्स्नेह,
शशि पाधा
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0 # Kiran Sinha 2010-05-15 07:42
Sudhji, apko bahut bahut badhai hai .

kiran and kapildeo sinha
Atlanta
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0 # Devi Nangrani 2010-06-04 01:11
Sudhaji
aapko is sahitya kruti ke liye meri badhayi sweekar ho. Ajj Shivna Prakshan ki or se aapka sangrah bhi Hasil hua hai.
mangalkamanon ke saath
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